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  • Urooj

मै भारत का संविधान हू



मै भारत का संविधान हू


MEIN BHARAT KA SAMVIDHAN HOON



सुना है भारतीयो का अभिमान हू मै

संविधान हूमै एकता ,अखण्डता न्याय का सम्मान हू

धर्म, जाति, वेषभूषा

अनेकता मे एकता का सूत्रधार हू

मै संविधान हू

मेरा कोई आकार नही

मैं सब मे निहितनिरंकार हू

मै संविधान हू

हा, एक बात है जो मैं कहना चाहता हू पर डर रहा हू

कही मुझपर भी प्रतिबंध न हो जाए

देश का बदला रंग देख मैं हैरान हू

मै चीख रहा हू चिल्ला रहा हू

मत करो ये जुल्म, सभी लोग अपने है

सुनो -सुनो मेरी सुनो

तुम नही, मैं संविधान हू

तुम्हारा ये बदलाव तीव्र है

जो ,ठहरे गा नही

न माने तुम मनमानी से तो

कोई न कोई भूचल होगा

इस तरह भला मसला , कोई हल होगा

हमारा देश हमारी मिट्टी

ये किस मोड़ पर है युग

स्वतंत्रता के मुह और ऑख पर

बाधी जा रही है पट्टी

70 वर्ष मैं क्या बूढ़ा हो गया

चलो बूढ़ा ही सही

पर तुम्हारा बाप हू

मै संविधान हू।


Suna hai bhartiyon ka abhiman hu mein

samvidhan hoon mein ekta, akhandta nyaaye ka samman hoon

dharm, jaati, veshbhoosha

anekta mein ekta ka sutradhaar hoon

Mein samvidhan hoon

mera koi aakar nahi

mein sab me nihitnirankaar hoon

mein samvidhan hoon

haan, ek baat hai jo mein kahna chahta hoon par dar raha hoon

kahi mujh par bhi pratibandh na hojaye

desh ka badla rang dekh mein hairan hoon

mein cheekh raha hoon, chilla raha hoon

mat karo ye zulm, sabhi log apne hain

suno- suno meri suno

tum nahi, mein samvidhan hoon

tumhara ye badlao tritva hai

jo thahrega nahi

na maane tum manmaani se to

koi na koi bhuchal hoga

is tarha bhala masla, koi hal hoga

hamara desh hamari mitti

ye kis modh par hai yug

swatantrata ke muh aur ankh par

baadhi jaa rahi hai patti

70 warsh mein kya budha ho gaya

chalo budha hi sahi

par tumhara baap hoon

mein samvidhan hoon



Rabiya Siddiqui

Introduction

मेरा जन्म इलाहाबाद के एक गाँव में हुआ| 12वीं तक की पढ़ाई किया ह| अभी मुंबई में हूँ| मशहूर कवियों की रचनाएँ पढ़ने के साथ साथ ख़ुद भी कविताएं लिखने का शौक लगातार जारी है| 2010 में शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी| यह सफ़र आसान न था लेकिन हौसले मज़बूत थे|

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