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फेमिनिज़्म (नारीवाद) –

नारीवाद के बारे में हर किसी ने सुना होगा पर कोई इसके मतलब को समझता नहीं और बिना समझे इसे एक गाली की तरह इस्तेमाल किया जाता है. आखिर ऐसा क्यों? अगर अपने हक़ के लिए लड़ना नारीवादी है तो हां हूँ मैं नारीवादी और मुझे खुद को एक नारीवादी कहने में न तो शर्म आ रही है और ना ही बेइज़्ज़ति महसूस हो रही है.

नारीवाद क्या है?

नारीवाद एक उद्देश्य है – दुनिया में, समाज में, महिलाओं की विशेष्य स्थिति के कारणों का पता लगाना और उनकी बेहतरी जके लिए अच्छा हल निकलना. महिलाएं किसी भी मामले में पुरूष से कम नहीं है इसके बावजूद उन्हे हमेशा उनके आधिकारो से दूर रखा जाता है. ये बात केवल एक महिला की नहीं है जिसे हम उनका निजी मामला समझकर हम सब खामोश हो जाते है. ये हर घर में हर महिला के साथ अत्याचार और नाइंसाफी और उन्हे पुरुषो के मुकाबले कम और नीचे दिखाया जा रहा है.

अगर ये समस्या केवल एक महिला के साथ होती तो हम इसे निजी मामला समझ सकते थे. ये बात केवल कही जाती है ;”बेटा – बेटी एक समान है परन्तु अभी भी बेटियों को वो सामान अधिकार नहीं मिलता.” नारीवाद राजनैतिक आंदलनों विचारधाराओ और सामाजिक आंदलनों की एक श्रेणी है. इसमे महिलाओं के लिए, पुरूषो के समान शैक्षिक और पेशावर का अवसर स्थापित करना शामिल हैं. जिससे उन्हें एक सामान अधिकार मिल सके.

नारीवादी आंदोलन – औरतों को राजनीती में भूमिका कुछ नहीं थी यह बात ज़्यादातर समाजों पर लागू होती थी. सिर्फ आदमी को ही अधिकार थे. फिर औरतों ने अपने अधिकार के लिए आवाज़ उठाई और बराबरी की मांग की. ऐसा क्यू होता है पुरूषो को अपने हक़ के लिए लड़ना नही होता और महिलाओं को अपनी बातें रखने के लिए भी सोचना पड़ता है?

औरतों के साथ भेद भाव के तरीके –

-अभी भी कई जगह माँ बाप को सिर्फ लड़के की चाह होती है. लड़की को पैदा होने से पहले ही मार दिया जाता है. – महिलाओं को उत्पीड़न शोषण और उन पर होने वाली हिंसा की खबरें हमें रोज़ सुनने को मिलती है. – औरते आज भी घर से बाहर निकलने में असुरछित महसूस करती है. – आज भी औरतो के ऊपर ज़ुल्म हो रहा है. कभी दहेज़ के लिए तो कभी अपनी हक़ के लिए उन्हे रोज़ मारा जा रहा है.

आज भी बहुत सी ऐसे औरतें है जो अपने हक़ से वंचित है जिन्हे अपने अधिकार के बारे में पता नहीं है.



Asma Shaikh


Introduction

मैं आसमा शैक्ख मास्टर आईटी की स्टूडेंट हूं| मैं पढ़ाई के साथ-साथ कविता भी लिखती हूं| मेरी कविता में लोगों की भावना और दर्द नजर आता है|

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