Search
  • Urooj

नारीवाद

थोड़ा भोली हु पर बेवकूफ तो नहीं

हां मासूम भी हूँ पर नासमझ तो नहीं

सबकी फिक्र रहती हे मुझे

पर अपने हक़ से महरूम हरगिज़ नहीं

हां थोड़ा अलग हु मैं तुमसे

लेकिन कमज़ोर नही हूं मैं

मज़बूत हूं इतनी के खुद के लिए लड सकुं

बहुत हुई ये ज़ुल्म सितम की लड़ाई

अब अपनी आवाज़ मैं खुद बनूंगी

जब जब गिराओगे तुम मुझे

पैरो पर खड़ी होकर तुम्हे दिखाउंगी

बहुत कह लिया तुमने मुझे बुज़दिल हु मैं

अब अपना नाम आसमान में लहराऊंगी

लङकी हो तुम क्या करोगी पीछे रहो मेरे महफूज़ रहोगी

अब बहुत हुआ, तुमसे आगे बढ़कर दिखाउंगी

हां कहोगे तुम मुझे नारीवाद तो कहना

अब मैं नारीवाद अपने हक़ के लिए लड़कर दिखाउंगी



Asma Shaikh


Introduction

मैं आसमा शैक्ख मास्टर आईटी की स्टूडेंट हूं| मैं पढ़ाई के साथ-साथ कविता भी लिखती हूं| मेरी कविता में लोगों की भावना और दर्द नजर आता है|

0 views

Recent Posts

See All

EDITORIAL VOL. IV

Parcham wishes everyone an Inqualabi Women’s Day. It is 111 years since International Women’s Day was first celebrated, a victory of collectivization of women against the inhumane working conditions,

International Women’s Day 8th March’2020

औरतें उठी नहीं तो…….. जुल्म बढ़ता जाएगा । औरतें उठी नहीं तो…….. जुल्म बढ़ता जाएगा । औरतें उठी नहीं तो…….. जुल्म बढ़ता जाएगा । आंतरराष्ट्रीय महिला दिन 8 मार्च 2020 औरतें उठी तो…….. ज़माना बदलेगा । औरतें उठ

©2019 by Parcham Collective. Proudly created with Wix.com