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आज़ाद.ए.हिन्द



आज़ाद.ए.हिन्द


Aazad-E-hind



आज़ाद.ए.हिन्द की कहानी तो याद होगी| लडे जो,वह बाग़ी उनकी कहानी तो याद होगी |

1857 से शुरू हूआ था, अंग्रेजो का ज़वाल | याद होगा, मंगल पण्डे और शाह ज़फर का जलाल|

लडे जो आज़ादी.ए वतन के लिए,उनकी फेहरिस्त तवील है | तारीख के पन्नो में उनकी पुख्ता दलील है |

कैसे नाम लिख दूं, किसी एक फर्द का | जज्बा था वो अव्वाम, बगावत और इतेहाद का

देखा जो भाईचारा, तो चली चाल मक्कारी की नाम मजहब का ले क्र, लोगो में फूट डाली थी

ले कर मजहबी पहचान हर शख्श, रस्ते पर निकल पड़ा हर घर कब्रस्तान और आगन शमशान सा जल गया

इंसानियत बेगुनाहों की लाशो, में दब गई थी| एक वतन की पहचान दो नक्शों में बट गई थी|

दानिशमंदी और तर्क की बुनियाद पर फिर अहद हमने लिया| “हिन्द का आईन” खुद को लाजिम उसूल की शक्ल में दिया |

देश भक्ति का नकाब ओढ़े,वो दुशम फिर आगया है | मज़हबी खानों में फिर से, लोगो को बाँट रहा है |

वक़्त आगया है फिर वही,इन्कलाब का परचम लेहराना होगा अपने दस्तूर की हिफाज़त के लिए,हमे साथ आना होगा |


Aazad-E-hind ki kahani to yaad hogilade jo, wo baagi unki kahani to yaad hogi

1857 se shuru hua tha, angrezon ka zawaalyaad hoga, mangal pande aur shah zafar ka jalal

lade jo aazadi-E-watan ke liye, unki fahrist taweel haitaarikh ke panno mein unki pukhta daleel hai

kaise naam likh doon, kisi ek fard kajazba tha wo awaam. bagawat or ittehad ka

dekha jo bhai chara, to chali chaal makkari kinaam mazhab ka lekar, logo mein foot daali thi

le kar mazhabi pahchan har shakhs. raste par nikal padahar ghar qabrastan or aangan shamshan sa jal gaya

insaniyat begunahon ki laashon mein dab gai thiek watan ki pahchan do naqsho mein bat gai thi

danishmandi or tark ki buniyad par fir ahed hamne liya”Hind ka Aayen” khud ko laazim usool ki shaqal mein diya

desh bhakti ka naqab odhe, wo dushman fir aagaya haimazhabi khano mein fir se, logon ko baant raha hai

waqt aagaya hai fir wahi, inquilab ka parcham lahrane hogaapne dastoor ki hifazat ke liye, hamein sath aana hoga



Aquila Khan


Introduction

मेरा नाम अकीला ख़ान है और मैं नारीवादी संघटन से जुडी हूँ| मुझे नज़्म लिखने और फ़िल्म बनाने में दिलचस्पी है और अपने नज़रिये को लफ़्ज़ों और विडियो की सूरत में सब के सामने रखना चाहती हूँ|

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